उत्तर प्रदेश में भूजल संरक्षण एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर सरकार और आम जनता को मिलकर काम करने की जरूरत है। प्रदेश में भूजल का स्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे कृषि, उद्योग और पेयजल संकट पैदा हो रहा है। सरकार ने भूजल संरक्षण के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन उनका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। एक नए सर्वेक्षण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भूजल का स्तर प्रति वर्ष 1.5 मीटर से अधिक गिर रहा है, जो एक खतरनाक दर है। इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार और जनता को मिलकर काम करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भूजल संरक्षण के लिए ‘भूजल संरक्षण मिशन’ चलाया है, जिसके तहत भूजल रिचार्ज शेड, रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और अन्य kỹ thuậtों का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार ने किसानों को भूजल संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 70% भूजल का उपयोग कृषि में किया जाता है, जबकि 20% उद्योगों और 10% पेयजल के लिए sử dụng होता है। भूजल संरक्षण के लिए हमें एक संतुलित विकास модели की जरूरत है, जिसमें कृषि, उद्योग और पेयजल के बीच सन्तुलन बनाया जा सके। उत्तर प्रदेश सरकार को भूजल संरक्षण के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे, जैसे कि राज्यमें नए जलसंचयन कोष्ठक का निर्माण, वर्षा जल संग्रहण प्रणाली को मजबूत करना, और किसानों को भूजल सánchez के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना। इस प्रयास में जनता को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी, जैसे कि वर्षा जल संग्रहण प्रणाली का उपयोग, भूजल का दुरुपयोग रोकना और जल संकट के प्रति जागरूकता फैलाना।
उत्तर प्रदेश में भूजल संरक्षण: एक नई दिशा