उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य में एक नए युग की शुरुआत हो रही है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच का मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था, लेकिन इस बार सपा ने अपनी रणनीति बदल दी है और कुछ नए चेहरे उतारे हैं। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी मैदान में कुल 685 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से 563 पुरुष और 122 महिलाएं हैं। इन चुनावों में कुल 15.47 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें से 8.35 करोड़ पुरुष और 7.12 करोड़ महिलाएं हैं। भाजपा ने इस बार अपने घोषणा पत्र में किसानों और युवाओं को खास तवज्जो दी है, जबकि सपा ने गरीबों और वंचित वर्ग को अपना मुख्य मुद्दा बनाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने चुनाव प्रचार में विकास और सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को अपना मुख्य मुद्दा बनाया है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसकी संभावनाएं काफी कम हैं। उत्तर प्रदेश के चुनावی नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे, जो कि राज्य की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करेंगे। इन चुनावों में कुल 1.74 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उत्तर प्रदेश के चुनाव आयोग ने इन चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक व्यवस्था की है।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य: एक नए युग की शुरुआत