पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा है। इस चुनाव में मतदाताओं की संख्या लगभग 10 करोड़ है, जिनमें से 49% महिलाएं हैं। मतदान के लिए 1,01,916 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से पहले चरण का मतदान 27 मार्च को हुआ था। इस चुनाव में कुल 293 सीटें हैं, जिनमें से 68 सीटें अनुसूचित जाति और 17 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। तृणमूल कांग्रेस ने 2016 में 211 सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी को महज 3 सीटें मिली थीं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने पश्चम बंगाल में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कई बड़े नेताओं को चुनाव में उतारा है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के लिए पूरे राज्य में चुनाव प्रचार किया है। उन्होंने लोगों से तृणमूल कांग्रेस को फिर से चुनने की अपील की है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में कई रैलियों को संबोधित किया है। उन्होंने लोगों से तृणमूल कांग्रेस को हराने और भारतीय जनता पार्टी को चुनने की अपील की है। पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का यह बदलाव दिलचस्प है और इसके परिणाम का सभी को इंतजार है। मतदान के बाद exit पोल के नतीजे भी दिलचस्प हो सकते हैं। इस बार के चुनाव में कई नए मुद्दे भी सामने आए हैं, जैसे कि राज्य में बेरोजगारी और आर्थिक विकास। मतदाताओं को लगता है कि इन मुद्दों पर ध्यान देने वाली पार्टी को वे चुनेंगे। इसलिए, पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का यह बदलाव देखने लायक है और इसके परिणाम का सभी को इंतजार है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का बदलाव