उत्तर प्रदेश में राजनीतिक घमासान: चुनावी आरोप-प्रत्यारोप का दौर

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने घोषणा पत्र में किसानों और युवाओं को लेकर कई बड़े वादे किए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने भाजपा पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस बीच, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे भाजपा और सपा के बहकावे में न आएं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भाजपा की सरकार ने प्रदेश में विकास के कई काम किए हैं और आगे भी ऐसा ही करना जारी रखेगी। उन्होंने सपा और बसपा पर आरोप लगाया कि वे प्रदेश को भाई-भतीजावाद और जातिवाद की राजनीति में फंसाना चाहते हैं। इस बीच, सपा के मुख्य प्रतिपादक अचल गुप्ता ने कहा है कि भाजपा की सरकार ने किसानों और युवाओं को धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनी तो किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य दिलाने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान किए जाएंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे भाजपा और सपा के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा है कि बसपा ही वह दल है जो प्रदेश को सही मायने में विकसित कर सकता है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 10 फरवरी से 7 मार्च तक होगा। इस बार के चुनाव में कुल 403 सीटों पर मतदान होगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। इस बीच, मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सभी दलों द्वारा कई बड़े वादे किए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन वादों को पूरा करने के लिए राजनीतिक दलों के पास कोई ठोस योजना है? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू होने में अब बस कुछ दिनों का समय बचा है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने चुनाव प्रचार को और तेज करने में जुटे हुए हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को यह तय करना है कि वे किसे अपना समर्थन देना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद 10 मार्च को मतगणना होगी। इसके बाद ही यह पता चलेगा कि उत्तर प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

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