उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति ka नाया दौर शुरू हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच का मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थीं जबकि सपा को 47 सीटें मिली थीं। इस बार सपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी। बीजेपी भी अपनी तैयारी में जुटी हुई है। पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। पाठक ने कहा है कि बीजेपी का लक्ष्य 350 सीटें जीतना है। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अगले साल जनवरी-फरवरी में होने की संभावना है। चुनाव आयोग ने अभी तक तारीखों का एलान नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक दल अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति का यह नाया दौर देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इस चुनाव में बीजेपी और सपा के अलावा अन्य दल भी अपना दावा पेश करेंगे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस भी चुनाव में उतरेंगी। बसपा की मुखिया मायावती ने कहा है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा बदलाव लाने जा रही है। कांग्रेस ने अभी तक अपनी रणनीति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन पार्टी के नेता कह रहे हैं कि वे उत्तर प्रदेश में एक मजबूत प्रदर्शन करने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति का यह नाया दौर क्या परिणाम लेकर आएगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।
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