राजनीति में महिलाओं की भागीदारी: एक नए युग की शुरुआत

भारत में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर कई वर्षों से चर्चा की जा रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, इस दिशा में कुछ सकारात्मक परिवर्तन देखे गए हैं। भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि के कारणों का विश्लेषण करना और इसके परिणामों को समझना महत्वपूर्ण है। एक अनुमान के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनाव में, लगभग 7.3% महिला उम्मीदवार खड़े हुए, जो 2014 के चुनाव की तुलना में लगभग 2% अधिक है। इसके अलावा, कई राज्यों में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया है, जो महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने में मदद करेगा। हालांकि, अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है, क्योंकि महिलाओं को अक्सर राजनीति में अनुचित व्यवहार और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में, लगभग 45% महिला नेताओं ने बताया कि उन्हें राजनीति में अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में अधिक आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, कई महिला नेताओं ने राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और सफलतापूर्वक अपने कार्यालय का संचालन किया है। उदाहरण के लिए, दिल्ली की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार में आतिथ्य एवं पर्यटन मंत्री रहीं राजस्थान की मंजू जी ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई है। इस प्रकार, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी एक जटिल मुद्दा है, जिसमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह भी एक अवसर है जो न केवल महिलाओं को बल्कि समाज को भी लाभ पहुंचा सकता है। इसलिए, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए हमें एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। हमें राजनीति में महिलाओं के लिए अधिक अवसर प्रदान करने और उन्हें आवश्यक समर्थन देने के लिए प्रयास करना चाहिए, ताकि वे अपने कौशल और योग्यता का पूर्ण उपयोग कर सकें।

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