उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति ने एक नई दिशा पकड़ ली है। इस बार के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को बदला है और नए-नए मुद्दों को उठाया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी अभियान में विकास और राष्ट्रवाद को मुख्य मुद्दा बनाया है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गरीबी और सामाजिक न्याय को अपने मुख्य मुद्दे बनाए हैं। कांग्रेस पार्टी ने भी अपने चुनावी अभियान में युवाओं और महिलाओं को重点 बनाया है। उत्तर प्रदेश की जनता अब इन मुद्दों पर विचार कर रही है और अपने नेताओं का चुनाव करने के लिए तैयार है। इस बार के चुनावों में उत्तर प्रदेश की जनता ने 60% से अधिक मतदान किया है, जो कि एक रिकॉर्ड है। चुनाव आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटों में से 250 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है, जबकि सपा और बसपा को respectively 120 और 30 सीटों पर बढ़त मिली है। कांग्रेस पार्टी को महज 10 सीटों पर बढ़त मिली है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश की जनता किस पार्टी को अपना समर्थन देगी और कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों का पूरे देश पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, सभी राजनीतिक दलों को अपने चुनावी अभियान में ईमानदारी और पारदर्शिता का परिचय देना चाहिए।
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