उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर से परिवर्तन की बयार चल रही है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल चुनावी समर की तैयारी में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस पार्टी सहित सभी प्रमुख दलों ने अपने चुनाव अभियान को तेज कर दिया है। इस बार के चुनाव में उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए 1500 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था बना हुआ है। भाजपा ने राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का वादा किया है, जबकि सपा और बसपा ने गरीबों और वंचित वर्गों के लिए विशेष पैकेजों की घोषणा की है। कांग्रेस पार्टी ने युवाओं और महिलाओं को आकर्षित करने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेला है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर कौन सा दल उत्तर प्रदेश की जनता का विश्वास हासिल कर पाता है। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करेंगे, इसलिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में लगा दी है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश की जनता किसे अपना नेता चुनती है।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य: चुनावी समर की तैयारी