उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति का परिदृश्य बदल गया है। पिछले कुछ वर्षों में, राज्य में राजनीतिक दलों के बीच नए गठबंधन और समझौते हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों ने चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। भाजपा ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के लिए काम किया है, जबकि बसपा और सपा ने अपने समर्थकों को एकजुट करने के लिए नई रणनीति अपनाई है। कांग्रेस ने भी अपने पैर जमाने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत और धार्मिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां के मतदाता जाति और धर्म के आधार पर वोट देते हैं। इसके अलावा, राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास भी चुनावी मुद्दे हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग 20 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 10 करोड़ महिलाएं हैं। राज्य में 80 लокसभा सीटें और 403 विधानसभा सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 312 सीटें जीती थीं, जबकि सपा और बसपा ने क्रमशः 47 और 19 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने सिर्फ 7 सीटें जीती थीं। इस बार के चुनाव में भाजपा को सपा और बसपा के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल सकती है। दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यह गठबंधन उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। उत्तर प्रदेश के मतदाता इस बार के चुनाव में क्या फैसला लेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। राज्य की राजनीति में जातिगत और धार्मिक समीकरणों के बीच, आर्थिक विकास और रोजगार भी महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।
उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति का बदला परिदृश्य