भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। महिलाएं देश की आबादी का लगभग 50% हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में उनकी भागीदारी बहुत कम है। भारतीय संसद में महिलाओं की संख्या कुल सदस्यों का मात्र 12% है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, खासकर तब जब महिलाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर रही हैं। भारतीय राजनीति में महिलाओं की कम भागीदारी के पीछे कई कारण हैं। महिलाओं को अक्सर राजनीति में आने से रोका जाता है, और उन्हें घरेलू कामों में व्यस्त रखा जाता है। इसके अलावा, महिलाओं के पास अक्सर पर्याप्त शिक्षा और संसाधन नहीं होते हैं जो उन्हें राजनीति में सफल होने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने इन चुनौतियों का सामना किया है और भारतीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इनमें से एक नाम है सोनिया गांधी, जो कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष हैं और भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक अन्य उदाहरण है ममता बैनर्जी, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और अपने राज्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही हैं। भारतीय राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें से एक है महिला आरक्षण विधेयक, जो महिलाओं को लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण प्रदान करेगा। यह विधेयक अभी भी संसद में लंबित है, लेकिन यह महिलाओं को राजनीति में बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, कई राजनीतिक पार्टियां महिलाओं को टिकट दे रही हैं और उन्हें अपने चुनाव अभियान में शामिल कर रही हैं। यह एक अच्छा संकेत है, क्योंकि इससे महिलाएं राजनीति में अपनी जगह बनाने में मदद कर सकती हैं। भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। महिलाओं को शिक्षा और संसाधन प्रदान करने, उन्हें घरेलू कामों से मुक्त करने, और उन्हें राजनीति में प्रोत्साहित करने के लिए काम करने की जरूरत है। इसके अलावा, राजनीतिक पार्टियों और सरकार को महिलाओं को अधिक टिकट देने और उन्हें अपने नेतृत्व में शामिल करने की जरूरत है। अगर हम ऐसा करते हैं, तो हम भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ा सकते हैं और देश को और भी बेहतर बना सकते हैं।
भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी